नई दिल्ली. मोदी सरकार के 4 साल में 31 हजार किलोमीटर
नेशनल हाईवे निर्माण का काम हुआ। यह यूपीए-2 के 5 साल के दौरान हुए 24,425
किलोमीटर के निर्माण कार्य से 26% ज्यादा है। हालांकि, दोनों सरकारों के
कार्यकाल में ज्यादातर काम मौजूदा हाईवे के विस्तार पर ही हुआ।
मोदी सरकार के दौरान हुए कुल हाईवे विकास कार्यों में से 76% काम मौजूदा राजमार्गों के सुधार और उन्हें 2 लेन में बदलने का हुआ। यूपीए-2 के दौरान
यह 60% था।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यूपीए-2 के दौरान कुल 24,425 किलोमीटर
निर्माण कार्य हुआ। इसमें से 16,650 किलोमीटर हाईवे विस्तार और 2-लेन पर
हुआ।
मोदी सरकार के दौरान इस साल जून तक हुए कुल 31 हजार किमी निर्माण कार्य में विस्तार और 2-लेन का काम 23,570 किलोमीटर है।
राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अगले साल मार्च तक हाईवे
निर्माण कार्य का आंकड़ा 39,000 किमी तक पहुंच जाएगा। साल 2009-2014 के
दौरान हुए निर्माण कार्यों से यह 60% ज्यादा होगा।चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से कहा है कि वे चुनावी घोषणा-पत्र जारी
होने के तीन दिन के भीतर उसकी तीन प्रति राज्यों में मुख्य निर्वाचन
पदाधिकारी को सौंपें। घोषणा पत्र में कोई ऐसा वादा नहीं करें जिसे पूरा
नहीं किया जा सके। इस प्रति का पहले मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ)
द्वारा परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद इसे केंद्रीय निर्वाचन आयोग को भेजा
जाएगा। यह जानकारी सोमवार को यहां सीईओ वीएल कांताराव ने दी। उन्होंने कहा
कि यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के इस संबंध में दिए आदेश के पालन में जारी की गई है।
सात दिन में स्टार प्रचारकों की अनुमति के लिए आवेदन दें : सीईओ
कांताराव ने बताया कि आयोग ने राजनीतिक दलों को अन्य प्रावधान भी किए हैं,
जिसमें उन्हें अधिसूचना जारी होने के सात दिन के भीतर स्टार प्रचारकों की
अनुमति के लिए आवेदन देना होगा। इसमें मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों एवं
राज्य दलों के लिए स्टार प्रचारकों की संख्या 40 निर्धारित है। अन्य दलों
के लिए यह संख्या 20 निर्धारित की गई है।
452 नए चैक पोस्ट बनाए : विधानसभा चुनाव में
उम्मीदवारों के खर्चे पर निगरानी के लिए प्रदेश में 848 एफएसटी और 840
एसएसटी का गठन किया गया है। इसके साथ ही अंतरराज्यीय सीमा पर 452 चैक पोस्ट
बनाए गए हैं। एफएसटी फ्लाइंग स्कॉट है, जो कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के
नेतृत्व में कार्य करेगा और अवैध गतिविधियों की सूचना मिलने अथवा संज्ञान
में आने पर कार्रवाई करेगा। वीडियो सर्विलेंस टीम (वीएसटी) निर्धारित
क्षेत्रों में होने वाली सभा और रैलियों की रिकाॅर्डिंग करेगी।
इधर, सुप्रीम कोर्ट में फर्जी वोटर लिस्ट मामले में आयोग और कांग्रेस आमने-सामने : मध्यप्रदेश और
राजस्थान विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद दोनों राज्यों में वोटर लिस्ट को
लेकर चुनाव आयोग और कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में आमने-सामने आ गए हैं।
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ अौर राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन
पायलट की याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कांग्रेस के
वकील कपिल सिब्बल और चुनाव आयोग के वकील विकास सिंह के बीच तीखी नोकझोंक
हुई।
कांग्रेस नेताओं ने वीवीपैट में मतदाताओं की रैंडम वेरिफिकेशन की मांग
की है। वहीं आयोग के वकील ने कहा कि इस याचिका के जरिए आयोग की छवि को
धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग आैर
कांग्रेस की दलीलों को सुनने के बाद इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।मशहूर फिलॉस्फर कन्फ्यूशियस ने कहा था कि जीवन बहुत सरल है, लेकिन हम
इसे जटिल बनाने की कोशिश करते रहते हैं। उन्हें इस सिद्धांत में फाइनेंस को
भी जोड़ना चाहिए था। जब भी आर्थिक जीवन को सरल बनाने की बात आती है लोग
अक्सर गलतियां करते हैं। आप मानें या ना मानें, सरल और साधारण प्लान आपके
लिए सबसे अच्छा हो सकता है।
मैंने अक्सर देखा है कि नए निवेशक इक्विटी की तरफ ज्यादा आकर्षित होते
हैं। गलती उनकी नहीं है। ऐसी खबरें अक्सर सुनने को मिलती हैं कि अमुक स्टॉक
ने पिछली तिमाही में 25% रिटर्न दिया या अमुक कंपनी के शेयर पिछले साल 30%
बढ़ गए। इक्विटी में पहली बार निवेश करने वालों के लिए यह समझना बहुत
मुश्किल होता है कि शुरू कहां से करें। वे इक्विटी और फंड में निवेश के
अंतर को भी ठीक से समझ नहीं पाते।
ऐसे निवेशकों को जो इक्विटी में पैसा लगाना चाहते हैं, मैं कम से कम
निवेश का तरीका अपनाने की सलाह देता हूं। मेरी राय पर कई बार लोगों को
आश्चर्य भी होता है। लेकिन जाने-माने निवेशक जॉर्ज सोरस ने भी कहा है कि
अगर निवेश में आपको मजा आ रहा है तो यह आपके लिए मनोरंजक तो होगा, लेकिन
संभवत: आपके लिए पैसे नहीं बनाएगा। निवेश कैसे किया जाए, इस पर लोगों की
अलग-अलग राय है। मैं बुनियादी सिद्धांतों का पालन करना पसंद करता हूं।
लालच को पहचानिए: किसी स्टॉक ने शॉर्ट टर्म में बहुत
अच्छा प्रदर्शन किया है तो उसके आधार पर आप निवेश का फैसला ना करें। इस
सूत्र को याद रखकर आप जोखिम वाले एसेट से बच सकते हैं। अक्सर ऐसे स्टॉक बबल
का शिकार होते हैं। यानी जब-तब इनका गुब्बारा फूटने का डर रहता है। गुब्बारा नहीं फूटा तो भी लॉन्ग टर्म में रिटर्न कम मिलता है।
धीरज रखिए: बाजार तत्काल अमीर बनाने का जरिया नहीं है। कोई ऐसा कहता है तो वह न तो निवेश है और ना ट्रेडिंग, वह जुआ है। लंबे समय
तक थोड़ा-थोड़ा मुनाफा कमाना कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने के जोखिम से
बेहतर होता है।
घबराएं नहीं: हमारी प्रवृत्थि तत्काल संतुष्टि वाली होती है। नुकसान के डर से हम छोटा-मोटा मुनाफा लेकर संतुष्ट हो जाते हैं।
इस सोच के साथ आप लंबे समय में संपत्ति नहीं बना सकते। हालांकि यह सोच भी
अनुभव और परिपक्वता के साथ आती है। इसलिए जब तक आप विशेष प्रयास करने के
लिए तैयार ना हो, तब तक इक्विटी से दूर रहना ही ठीक होगा। दूसरा विकल्प है
कि म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश कीजिए। इसमें भी तीन बातों का ध्यान रखना चाहिए-
फंड के लक्ष्य को समझें। यह सुनिश्चित करें कि फंड जोखिम लेने की आपकी प्रवृत्ति के मुताबिक है या नहीं।
फंड का एसेट एलोकेशन अलग-अलग माध्यमों में होना चाहिए। इससे स्कीम का जोखिम कम होगा।
फंड मैनेजर के प्रोफाइल और पुराने अनुभव को देखें। यह भी कि उसकी दूसरी स्कीम्स ने कैसा रिटर्न दिया है।
संपत्ति बनाने के लिए जटिल चार्ट बनाना और दिमाग खराब करने वाला कैलकुलेशन
जरूरी नहीं है। स्मार्ट इन्वेस्टिंग के बहुत से तरीके आसान और पुराने हैं।
आपके निवेश की स्ट्रेटेजी आसान होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ अनुशासन और
धैर्य भी उतना ही जरूरी है।
Tuesday, October 9, 2018
Thursday, September 27, 2018
आधार अनिवार्य नहीं होता तो नहीं होती संतोषी की मौत
पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद आफ़रीदी ने भी टीम के ख़राब प्रदर्शन
की जमकर आलोचना की. आफ़रीदी ने ट्वीट किया, "बांग्लादेश को मुबारकबाद.
पाकिस्तान के प्रदर्शन से निराश हूँ. क्रिकेट में सभी क्षेत्रों में
आक्रामक खेल देखने को नहीं मिला. ये वही युवा टीम है जिसने पिछले
टूर्नामेंट्स में अच्छा प्रदर्शन किया था और हमारी उम्मीदें बढ़ा दी थी."
कप्तान सरफ़राज़ ने भी माना कि टीम ने अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा, "हमारी फ़ील्डिंग अच्छी नहीं रही, हमारी बैटिंग धराशाई हो गई और किसी भी क्षेत्र में टीम ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. फ़ख़र हमारे प्रमुख बल्लेबाज़ थे, शादाब और नवाज़ के पास भी मौके थे. हमें अच्छी टीमों के ख़िलाफ़ जीत हासिल करने के लिए बेहतर खेल दिखाने की ज़रूरत है. हमारी बिखरी बल्लेबाज़ी ने हमें सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाया. शाहीन हमारे लिए प्लस प्वाइंट रहे. उन्हें मौका मिला और साबित किेया कि उनमें प्रतिभा है."
मैच के बाद पूर्व कप्तान रमीज राजा ने कहा कि ये टूर्नामेंट तो आप (पाकिस्तान) के लिए अच्छा नहीं रहा, लेकिन पाकिस्तान जाते हुए सफर सुरक्षित रखिएगा, इस पर सरफ़राज़ ने हंसते हुए कहा, "अभी तो यहीं हैं रमीज भाई."
पाकिस्तानी सोशल मीडिया में भी सरफ़राज़ की कप्तानी को लेकर खूब चकल्लस मची.
एक यूजर ने हैंडल से ट्वीट किया, "सरफ़राज़ भैया और कोच मिकी आर्थर को निकालिए. इन दोनों ने राजनीति और भाई भतीजावाद से टीम को तबाह कर दिया है."
मलिक अदनान मजोका ने ट्वीट किया, "अब समय आ गया है सरफ़राज़ अहमद को निकालने का."
ऐसा नहीं है कि अब चारों तरफ सरफ़राज़ की कप्तानी में कमियां गिनाने वाले लोग ही रह गए हैं. भारत के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने सरफ़राज़ की कप्तानी की तारीफ़ की थी. गांगुली ने कहा था, "सरफ़राज़ बेहद साहसी खिलाड़ी हैं और जिस तरह से उन्होंने पिछले साल चैंपियंस ट्रॉफ़ी में कप्तानी की थी वो शानदार था."
गांगुली ने ये भी कहा था कि उन जैसे (सरफ़राज़) कप्तान हर रोज पैदा नहीं होते.
घर में राशन नहीं होने के कारण वे संतोषी को भात नहीं खिला सकी थीं. उन्हें तब आठ महीने से राशन इसलिए नहीं मिल सका था क्योंकि उनका आधार कार्ड राशन डीलर के पीओएस (प्वाइंट आफ सेल्स) मशीन से लिंक्ड नहीं हो था. झारखंड सरकार ने तब ऐसे तमाम राशन कार्ड रद्द कर दिए थे.
यह मामला सुर्ख़ियों में रहा था और झारखंड समेत पूरे देश में भूख से हो रही मौत पर गंभीर बहसों की शुरुआत हुई थी. कुछ सोशल एक्टिविस्ट द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के मुताबिक़, पिछले चार साल के दौरान देश में 56 लोगों की मौत भूख से हो गई है.
इनमें से 42 मौतें 2017-18 के दौरान हुई हैं. इनमें से कम से कम 25 मौतों के लिए किसी न किसी रूप में आधार कार्ड ज़िम्मेदार था. जबकि 18 मौतें सीधे तौर पर आधार कार्ड के कारण हुई थीं. इन आंकड़ों को मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता रितिका खेड़ा और सिराज दत्ता ने स्वाति नारायण की मदद से तैयार किया है.
इसके मुताबिक़ भूख से सर्वाधिक मौतें झारखंड और उत्तर प्रदेश में हुई हैं. बीबीसी के पास यह पूरी लिस्ट मौजूद है.
इस आंकड़े को तैयार करने वाली टीम के सदस्य सिराज दत्ता ने बीबीसी से कहा, "यह गंभीर चिंता का विषय है कि भारत में भूख से हो रही मौत मीडिया की सुर्ख़ियां नहीं बनती. पिछले चार साल के दौरान भूखमरी से 56 मौतों के बावजूद सरकार की इससे बेरुखी हमें चिंतित करती है. हम लोगों ने यह आंकड़ा मीडिया रिपोर्ट्स और खुद द्वारा संग्रहित तथ्यों के आधार पर तैयार किया है. मरने वाले अधिकतर लोग वंचित समुदायों (आदिवासी, दलित, मुसलमान) से थे. यह हमें चिंतित करता है."
सिराज दत्ता ने यह भी कहा, "अव्वल तो यह कि सरकारें इन मौतों को स्वीकार ही नहीं करतीं. कुछ मामलों (संतोषी की मौत समेत) में तो सरकारों ने इसे दूसरी दिशा में भी मोड़ने की कोशिशें की हैं. होना यह चाहिए कि सरकार भूखमरी को स्वीकारे और इससे बचने के उपाय खोजे. आधार कार्ड की अनिवार्यता के कारण हुई मौतों के लिए आप किसे ज़िम्मेदार मानेंगे."
कोयली देवी का दर्द संतोषी की भूख से मौत के बाद सरकार ने उसकी मां कोयली देवी को सिर्फ़ पचास हजार रुपये दिए.
उनके घर में आज भी सिर्फ़ तीन हफ़्ते का राशन (चावल) है. हरी सब्ज़ियां, दाल, फल और दूध उनके भोजन में किसी 'विशिष्ट अतिथि'की तरह आता है तो मुर्गा (चिकेन) बनना 'सालाना जलसे' की तरह है.
कोयली देवी ने बीबीसी से कहा, "आधार कार्ड अगर ज़रूरी नहीं होता, तो मेरी बेटी ज़िंदा होती. उसकी मौत आधार कार्ड के कारण हुई. उसके बाद सरकार ने पचास हज़ार रुपये दिए, जिसमें अब सिर्फ़ 500 रुपये बचे हैं. पैसा मेरे इलाज में ख़र्च में हो गया. न तो मेरा घर बना और न फिर कोई पूछने आया. राशन बंद हो जाए, तो हमलोग भूखे मर जाएंगे."
उन्होंने कहा, "मेरे पति तताय नायक बीमार हैं. सास देवकी देवी अब 80 साल की हैं. बड़ी बेटी प्रेम विवाह करके चली गई. अब नौ साल की चांदो और तीन साल के प्रकाश के सहारे मेरी ज़िंदगी चल रही है. दातून का एक मुट्ठा (बंडल) बेचिए तो पांच रुपये मिलते हैं. कैसे लाएंगे दूध और कहां से खिलाएंगे दाल. मेरे बच्चे इसके बग़ैर ज़िंदा हैं. हो सके तो मेरा घर बनवा दीजिए और 'आधार कार्ड' जैसे कार्ड हम समझ नहीं पाते. इससे क्या फ़ायदा होगा, नहीं जानते. लेकिन, घाटा (बेटी की मौत) तो हो चुका है.
कोयली देवी झोपड़ी में रहती हैं. इसके बगल में इमली का पेड़ है. उसकी छाया के नीचे बिछी चटाई पर वह हमसे मुख़ातिब थीं लेकिन उसका फल उन्हें नसीब नहीं. वह इमली का पेड़ उनका नहीं है. पहले जब उनके पति बाजा बजाते थे, तब महाजनों ने उन्हें इनाम में यह पेड़ दिया. अब वे बाजा नहीं बजा पाते तो इसका फल भी पेड़ का मालिक ले जाता है.
उनकी झोपड़ी के बगल में उनके जेठ पोती नायक की भी छोपड़ी है. वह और खराब हालत में हैं. उनके छह बच्चे हैं, जिनमे से एक बेटी की शादी हो चुकी है.
'आधार' की अनिवार्यता के मारे इस परिवार में सरकारी सुविधा के नाम पर एक छोटा-सा शौचालय है, जो स्वच्छता अभियान के 'स्मारक' के बतौर खड़ा है.
संतोषी की मौत के बाद प्रशासन यहां के लोगों को मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलाने रांची ले गया था.
तब मुख्यमंत्री ने कहा था कि गांव वालों को अगरबत्ती और मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण मिलेगा. उसकी बिक्री भी करायी जाएगी. ग्रामीणों को बकरी और सूअर पालन की योजनाएं दी जाएंगी.
अब एक साल बाद भी गांव में इन आश्वासनों पर कोई अमल नहीं हुआ है. पहचान गुप्त रखने की शर्त पर एक महिला ने बताया कि मोमबत्ती-अगरबत्ती वाला ठेकेदार भाग गया. वहां ताला बंद है. सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं किया.
इस गांव के सभी लोगों का आधार कार्ड बन गया और एक ट्रांसफ़ार्मर लगा है. संतोषी की मौत ने सिर्फ़ यही परिवर्तन किया है.
कप्तान सरफ़राज़ ने भी माना कि टीम ने अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा, "हमारी फ़ील्डिंग अच्छी नहीं रही, हमारी बैटिंग धराशाई हो गई और किसी भी क्षेत्र में टीम ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. फ़ख़र हमारे प्रमुख बल्लेबाज़ थे, शादाब और नवाज़ के पास भी मौके थे. हमें अच्छी टीमों के ख़िलाफ़ जीत हासिल करने के लिए बेहतर खेल दिखाने की ज़रूरत है. हमारी बिखरी बल्लेबाज़ी ने हमें सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाया. शाहीन हमारे लिए प्लस प्वाइंट रहे. उन्हें मौका मिला और साबित किेया कि उनमें प्रतिभा है."
मैच के बाद पूर्व कप्तान रमीज राजा ने कहा कि ये टूर्नामेंट तो आप (पाकिस्तान) के लिए अच्छा नहीं रहा, लेकिन पाकिस्तान जाते हुए सफर सुरक्षित रखिएगा, इस पर सरफ़राज़ ने हंसते हुए कहा, "अभी तो यहीं हैं रमीज भाई."
पाकिस्तानी सोशल मीडिया में भी सरफ़राज़ की कप्तानी को लेकर खूब चकल्लस मची.
एक यूजर ने हैंडल से ट्वीट किया, "सरफ़राज़ भैया और कोच मिकी आर्थर को निकालिए. इन दोनों ने राजनीति और भाई भतीजावाद से टीम को तबाह कर दिया है."
मलिक अदनान मजोका ने ट्वीट किया, "अब समय आ गया है सरफ़राज़ अहमद को निकालने का."
ऐसा नहीं है कि अब चारों तरफ सरफ़राज़ की कप्तानी में कमियां गिनाने वाले लोग ही रह गए हैं. भारत के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने सरफ़राज़ की कप्तानी की तारीफ़ की थी. गांगुली ने कहा था, "सरफ़राज़ बेहद साहसी खिलाड़ी हैं और जिस तरह से उन्होंने पिछले साल चैंपियंस ट्रॉफ़ी में कप्तानी की थी वो शानदार था."
गांगुली ने ये भी कहा था कि उन जैसे (सरफ़राज़) कप्तान हर रोज पैदा नहीं होते.
सिमडेगा (झारखंड) ज़िले के कारीमाटी
में कोयली देवी के घर जब मैं पहुंचा, तो वे अपने तीन साल के बेटे प्रकाश को
साग-भात खिला चुकी थीं. उन्होंने कोहड़े (कुम्हड़ा) के पत्ते का साग बनाया
था.
साल 2017 के 28 सितंबर को उनकी 11 साल की बेटी संतोषी कुमारी
की मौत भूख से हो गई थी. कल इस मौत की पहली बरसी है. वह नहीं भूल पातीं कि
पिछले साल उनकी बेटी भात-भात की रट लगाते हुए मर गई थी. घर में राशन नहीं होने के कारण वे संतोषी को भात नहीं खिला सकी थीं. उन्हें तब आठ महीने से राशन इसलिए नहीं मिल सका था क्योंकि उनका आधार कार्ड राशन डीलर के पीओएस (प्वाइंट आफ सेल्स) मशीन से लिंक्ड नहीं हो था. झारखंड सरकार ने तब ऐसे तमाम राशन कार्ड रद्द कर दिए थे.
यह मामला सुर्ख़ियों में रहा था और झारखंड समेत पूरे देश में भूख से हो रही मौत पर गंभीर बहसों की शुरुआत हुई थी. कुछ सोशल एक्टिविस्ट द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के मुताबिक़, पिछले चार साल के दौरान देश में 56 लोगों की मौत भूख से हो गई है.
इनमें से 42 मौतें 2017-18 के दौरान हुई हैं. इनमें से कम से कम 25 मौतों के लिए किसी न किसी रूप में आधार कार्ड ज़िम्मेदार था. जबकि 18 मौतें सीधे तौर पर आधार कार्ड के कारण हुई थीं. इन आंकड़ों को मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता रितिका खेड़ा और सिराज दत्ता ने स्वाति नारायण की मदद से तैयार किया है.
इसके मुताबिक़ भूख से सर्वाधिक मौतें झारखंड और उत्तर प्रदेश में हुई हैं. बीबीसी के पास यह पूरी लिस्ट मौजूद है.
इस आंकड़े को तैयार करने वाली टीम के सदस्य सिराज दत्ता ने बीबीसी से कहा, "यह गंभीर चिंता का विषय है कि भारत में भूख से हो रही मौत मीडिया की सुर्ख़ियां नहीं बनती. पिछले चार साल के दौरान भूखमरी से 56 मौतों के बावजूद सरकार की इससे बेरुखी हमें चिंतित करती है. हम लोगों ने यह आंकड़ा मीडिया रिपोर्ट्स और खुद द्वारा संग्रहित तथ्यों के आधार पर तैयार किया है. मरने वाले अधिकतर लोग वंचित समुदायों (आदिवासी, दलित, मुसलमान) से थे. यह हमें चिंतित करता है."
सिराज दत्ता ने यह भी कहा, "अव्वल तो यह कि सरकारें इन मौतों को स्वीकार ही नहीं करतीं. कुछ मामलों (संतोषी की मौत समेत) में तो सरकारों ने इसे दूसरी दिशा में भी मोड़ने की कोशिशें की हैं. होना यह चाहिए कि सरकार भूखमरी को स्वीकारे और इससे बचने के उपाय खोजे. आधार कार्ड की अनिवार्यता के कारण हुई मौतों के लिए आप किसे ज़िम्मेदार मानेंगे."
कोयली देवी का दर्द संतोषी की भूख से मौत के बाद सरकार ने उसकी मां कोयली देवी को सिर्फ़ पचास हजार रुपये दिए.
उनके घर में आज भी सिर्फ़ तीन हफ़्ते का राशन (चावल) है. हरी सब्ज़ियां, दाल, फल और दूध उनके भोजन में किसी 'विशिष्ट अतिथि'की तरह आता है तो मुर्गा (चिकेन) बनना 'सालाना जलसे' की तरह है.
कोयली देवी ने बीबीसी से कहा, "आधार कार्ड अगर ज़रूरी नहीं होता, तो मेरी बेटी ज़िंदा होती. उसकी मौत आधार कार्ड के कारण हुई. उसके बाद सरकार ने पचास हज़ार रुपये दिए, जिसमें अब सिर्फ़ 500 रुपये बचे हैं. पैसा मेरे इलाज में ख़र्च में हो गया. न तो मेरा घर बना और न फिर कोई पूछने आया. राशन बंद हो जाए, तो हमलोग भूखे मर जाएंगे."
उन्होंने कहा, "मेरे पति तताय नायक बीमार हैं. सास देवकी देवी अब 80 साल की हैं. बड़ी बेटी प्रेम विवाह करके चली गई. अब नौ साल की चांदो और तीन साल के प्रकाश के सहारे मेरी ज़िंदगी चल रही है. दातून का एक मुट्ठा (बंडल) बेचिए तो पांच रुपये मिलते हैं. कैसे लाएंगे दूध और कहां से खिलाएंगे दाल. मेरे बच्चे इसके बग़ैर ज़िंदा हैं. हो सके तो मेरा घर बनवा दीजिए और 'आधार कार्ड' जैसे कार्ड हम समझ नहीं पाते. इससे क्या फ़ायदा होगा, नहीं जानते. लेकिन, घाटा (बेटी की मौत) तो हो चुका है.
कोयली देवी झोपड़ी में रहती हैं. इसके बगल में इमली का पेड़ है. उसकी छाया के नीचे बिछी चटाई पर वह हमसे मुख़ातिब थीं लेकिन उसका फल उन्हें नसीब नहीं. वह इमली का पेड़ उनका नहीं है. पहले जब उनके पति बाजा बजाते थे, तब महाजनों ने उन्हें इनाम में यह पेड़ दिया. अब वे बाजा नहीं बजा पाते तो इसका फल भी पेड़ का मालिक ले जाता है.
उनकी झोपड़ी के बगल में उनके जेठ पोती नायक की भी छोपड़ी है. वह और खराब हालत में हैं. उनके छह बच्चे हैं, जिनमे से एक बेटी की शादी हो चुकी है.
'आधार' की अनिवार्यता के मारे इस परिवार में सरकारी सुविधा के नाम पर एक छोटा-सा शौचालय है, जो स्वच्छता अभियान के 'स्मारक' के बतौर खड़ा है.
संतोषी की मौत के बाद प्रशासन यहां के लोगों को मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलाने रांची ले गया था.
तब मुख्यमंत्री ने कहा था कि गांव वालों को अगरबत्ती और मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण मिलेगा. उसकी बिक्री भी करायी जाएगी. ग्रामीणों को बकरी और सूअर पालन की योजनाएं दी जाएंगी.
अब एक साल बाद भी गांव में इन आश्वासनों पर कोई अमल नहीं हुआ है. पहचान गुप्त रखने की शर्त पर एक महिला ने बताया कि मोमबत्ती-अगरबत्ती वाला ठेकेदार भाग गया. वहां ताला बंद है. सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं किया.
इस गांव के सभी लोगों का आधार कार्ड बन गया और एक ट्रांसफ़ार्मर लगा है. संतोषी की मौत ने सिर्फ़ यही परिवर्तन किया है.
Monday, September 17, 2018
#MeToo之后:改善中国环保界性别平等现状
#MeToo运动近期相继在中国的学术界、公益界和媒体界爆发,用残酷的事实展示了工作场合性骚扰、性侵犯的普遍性。人们批判施暴者漠视道德准则和他人尊严,呼吁尽早建立预防和惩罚性骚扰的有效机制。
被曝光的性侵行为往往发生于掌握权力的男性和处于弱势的女性之间(如男记者与女实习生、男性机构负责人与女志愿者),凸显出职场乃至整个社会中存在着基于权力不平等的侵害行为,环保公益领域也不例外。因此,反对性骚扰只是一个开始。女性的诉求不应止步于获得保护,她们需要更主动地、更全面地参与到追求性别平等、重塑权力结构的进程中。
环境领域的性别不平等
性骚扰事件可谓是性别不平等的极端体现,其实职场中还存在许多看似更“温和”的问题。环境领域的工作者对这些现象一定不觉得陌生:大大小小的会议上,在台上侃侃而谈的多是男士,虽然研究相同议题的女性并不罕见(国际上,这被形象的称为 ,既 );环境新闻报道中更多引用的是男性专家的观点和意见;在很多环保机构中,尽管总体上女性员工更多,但管理层还是以男性为主。
这一类的问题不以暴力的形式出现,但却会系统性的限制女性职业发展、固化男性主导的权力结构。很多人觉得上述现象司空见惯,其实也是默许了性别不平等的事实。
环保组织的工作往往希望对外界产生影响。因而,内在的性别权力失衡会随着工作的开展产生外部影响。比如,政策制定本应吸收多方意见,如果参与讨论的总是固定的一群人且男性居多,最终推出的政策很可能无法有效反映女性的利益诉求,从而又进一步强化了男性主导的局面。而事实上,女性往往更易受环境污染和气候变化影响,她们的诉求本该成为政策和项目设计的重点。虽然女性也完全可以是男权、父权的维护者,但增加女性发声机会和女性领导者的数量仍不失为弥补两性权力差距的良方。
现在就可以开始改变
丑闻曝光之后,众多国内公益机构就公开做出了反性骚扰承诺,这样的快速回应也给人以希望。毕竟,比起受体制严格束缚的政届、商界和学术界, 行业更具备发生变革的基础和潜力。
提高女性话语权和影响力是一个复杂、缓慢的过程,但已经有人开始采取一些切实可行的行动。比如,让女性专家的观点和声音更多的出现在媒体报道中。例如, s团队就搜集整理了一份研究中国问题的女性专家名单,包含专家们的专业领域和联系方式。这份名单免费供其他记者使用,以鼓励同行将更多女性声音纳入报道。不过,这份名单上中国籍的女性专家仍是少数,可以做进一步的扩充。针对中文媒体工作者,类似的名单和倡议也值得推广。
再比如,在各类会议上为女性参与者提供更多的发言机会,杜绝“全男性论坛”( )现象。在环境领域工作的女性众多,只要能将性别平等作为组织会议的一项基本原则,这一点应该不难实现。在具体操作上,欧洲同仁的做法可资借鉴:旨在提高欧盟政策讨论中性别多样性的倡议 已经编写了一份指南,不管你是会议组织方还是参会嘉宾,你都可以在指南里了解到如何以自身的行动提高会议中的性别平等。
更大胆一些…
爱尔兰前总统 和爱尔兰喜剧演员 于近期启动的一个新项目提出了比单纯的“平权”更具雄心的想法。这个名为“创造之母”( )的倡议计划通过播客的形式,讲述全球各地女性应对气候变化的行动。她们认为气候变化问题有其更深刻的根源:“父权资本主义制度将不会解决气候变化问题,而我们需要去。”
性别平等并不是要在现有体制下与男性“争权”,而是要彻底改变父权制的格局,建立一套女性主义的治理和行为模式。具体到环境议题上,就像 所说:“由人类活动引发的气候变化需要女性主义的解决方案”。这个思路也适用于中国所面对的众多环境挑战。
被曝光的性侵行为往往发生于掌握权力的男性和处于弱势的女性之间(如男记者与女实习生、男性机构负责人与女志愿者),凸显出职场乃至整个社会中存在着基于权力不平等的侵害行为,环保公益领域也不例外。因此,反对性骚扰只是一个开始。女性的诉求不应止步于获得保护,她们需要更主动地、更全面地参与到追求性别平等、重塑权力结构的进程中。
环境领域的性别不平等
性骚扰事件可谓是性别不平等的极端体现,其实职场中还存在许多看似更“温和”的问题。环境领域的工作者对这些现象一定不觉得陌生:大大小小的会议上,在台上侃侃而谈的多是男士,虽然研究相同议题的女性并不罕见(国际上,这被形象的称为 ,既 );环境新闻报道中更多引用的是男性专家的观点和意见;在很多环保机构中,尽管总体上女性员工更多,但管理层还是以男性为主。
这一类的问题不以暴力的形式出现,但却会系统性的限制女性职业发展、固化男性主导的权力结构。很多人觉得上述现象司空见惯,其实也是默许了性别不平等的事实。
环保组织的工作往往希望对外界产生影响。因而,内在的性别权力失衡会随着工作的开展产生外部影响。比如,政策制定本应吸收多方意见,如果参与讨论的总是固定的一群人且男性居多,最终推出的政策很可能无法有效反映女性的利益诉求,从而又进一步强化了男性主导的局面。而事实上,女性往往更易受环境污染和气候变化影响,她们的诉求本该成为政策和项目设计的重点。虽然女性也完全可以是男权、父权的维护者,但增加女性发声机会和女性领导者的数量仍不失为弥补两性权力差距的良方。
现在就可以开始改变
丑闻曝光之后,众多国内公益机构就公开做出了反性骚扰承诺,这样的快速回应也给人以希望。毕竟,比起受体制严格束缚的政届、商界和学术界, 行业更具备发生变革的基础和潜力。
提高女性话语权和影响力是一个复杂、缓慢的过程,但已经有人开始采取一些切实可行的行动。比如,让女性专家的观点和声音更多的出现在媒体报道中。例如, s团队就搜集整理了一份研究中国问题的女性专家名单,包含专家们的专业领域和联系方式。这份名单免费供其他记者使用,以鼓励同行将更多女性声音纳入报道。不过,这份名单上中国籍的女性专家仍是少数,可以做进一步的扩充。针对中文媒体工作者,类似的名单和倡议也值得推广。
再比如,在各类会议上为女性参与者提供更多的发言机会,杜绝“全男性论坛”( )现象。在环境领域工作的女性众多,只要能将性别平等作为组织会议的一项基本原则,这一点应该不难实现。在具体操作上,欧洲同仁的做法可资借鉴:旨在提高欧盟政策讨论中性别多样性的倡议 已经编写了一份指南,不管你是会议组织方还是参会嘉宾,你都可以在指南里了解到如何以自身的行动提高会议中的性别平等。
更大胆一些…
爱尔兰前总统 和爱尔兰喜剧演员 于近期启动的一个新项目提出了比单纯的“平权”更具雄心的想法。这个名为“创造之母”( )的倡议计划通过播客的形式,讲述全球各地女性应对气候变化的行动。她们认为气候变化问题有其更深刻的根源:“父权资本主义制度将不会解决气候变化问题,而我们需要去。”
性别平等并不是要在现有体制下与男性“争权”,而是要彻底改变父权制的格局,建立一套女性主义的治理和行为模式。具体到环境议题上,就像 所说:“由人类活动引发的气候变化需要女性主义的解决方案”。这个思路也适用于中国所面对的众多环境挑战。
Monday, September 3, 2018
वामपंथियों पर एक्शन: SC की कड़ी टिप्पणी, विरोध को रोकेंगे तो लोकतंत्र टूट जाएगा
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में हुई वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारियों पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने
सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि विरोध लोकतंत्र का
सेफ्टी वॉल्व है, यदि प्रेशर कुकर में सेफ्टी वॉल्व नहीं होगा तो वो फट
सकता है.
बता दें कि भीमा कोरेगांव हिंसा
मामले में हुई गिरफ्तारियों के खिलाफ इतिहासकार रोमिला थापर, देवकी जैन,
अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे और मजा दारूवाला ने सुप्रीम
कोर्ट में एक याचिका लगाई थी. जिस पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस डी
वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच के समक्ष याचिकाकर्ताओं की
तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, दुष्यंत दवे, राजू रामचंद्रन,
प्रशांत भूषण, और वृंदा ग्रोवर, वहीं सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनलर
तुषार मेहता मौजूद थे.
सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच के सामने याचिकाकर्ताओं की तरफ से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने
कहा कि पुलिस की एफआईआर में गिरफ्तार लोगों का कोई जिक्र ही नहीं है और ना
ही आरोपियों के ऊपर किसी तरह की मीटिंग करने का आरोप है.
सिंघवी ने कहा कि गिरफ्तार लोगों में से एक (सुधा
भारद्वाज) ने अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ते हुए भारत में वकालत करने को
अपने पेशे के तौर पर चुना, वह दिल्ली की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ाती
भी हैं. लेकिन बड़ा मामला सरकार से असहमति का है.
वहीं सिंघवी का विरोध करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनलर
तुषार मेहता ने कहा जिन लोगों का इस केस से कोई लेना नहीं है वे
(याचिकाकर्ता) सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हैं. जिस पर सिंघवी ने कहा कि यह
मामला संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा सुनिश्चित जीने के अधिकार और आजादी के
अधिकार से जुड़ा है. लिहाजा इन गिरफ्तारीयों पर रोक लगाई जाए.
वहीं वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि यह गिरफ्तारियां बिना सोचे-समझे की गई हैं, जिसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है.
सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस चंद्रचूण ने
महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि असहमति या नाइत्तेफाकी
हमारे लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व है, यदि आप प्रेशर में सेफ्टी वॉल्व नहीं
लगाएंगे तो वो फट सकता है. लिहाजा अदालत आरोपियों को अंतरिम राहत देते हुए
अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक लगाती है, तब तक सभी आरोपी हाउस अरेस्ट
में रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 6 सितंबर को होगी.
गौरतलब है कि भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में
देश के कई हिस्सों में मंगलवार को पुणे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कई
वामपंथी विचारकों के घरों पर छापेमारी की. ये छापेमारी महाराष्ट्र, गोवा,
तेलंगाना, दिल्ली और झारखंड में की गई. पुणे पुलिस ने स्थानीय पुलिस के साथ
मिलकर छापेमारी की. इस मामले में समाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, वरवरा
राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और वरनोन गोंजालवेस गिरफ्तार किए गए थे.
मध्य प्रदेश की प्रियंका भदोरिया ने शादी से पहले ससुराल वालों के सामने एक ऐसी डिमांड रख दी जिसे सुनकर सबके कान खड़े हो गए. प्रियंका ने अपने ससुराल वालों से साफ कह दिया कि जब तक वे 10 हजार पौधे नहीं लगाएंगे, वो शादी नहीं करेंगी. ससुराल वालों को ये सुनना थोड़ा अजीब जरूर लगा लेकिन उन्होंने प्रियंका की मांग मान ली और बीते शुक्रवार घूमधाम से उन्होंने प्रियंका के साथ अपने बेटे की शादी करवा दी.
प्रियंका भिंड के किशीपुरा गांव की रहने वाली हैं. जहां शादी से पहले दुल्हन से पूछा जाता है कि उसे क्या चाहिएरियंका 10 साल की उम्र से पौधे लगा रही है और इसे इत्तेफाक ही कहेंगे कि उनकी शादी भी इंटरनेशनल अर्थ डे के दिन ही हुई. प्रियंका के पति रवि चौहान भी अपनी पत्नी की सूझबूझ से काफी खुश है. उन्हें खुशी है कि उनकी पत्नी पर्यावरण के प्रति इतनी सजग हैं. प्रियंका चाहती हैं कि 10 हजार पौधे की शर्त में से पांच हजार पौधे उनके मायके में लगाए जाएं और पांच हजार उनके ससुराल में. आज जहां देश का एक बड़ा हिस्सा सूखे से प्रभावित है ऐसे में प्रियंका की ये पहल वाकई एक जरूरी और बेहतरीन प्रयास है.
Friday, August 31, 2018
राहुल गांधी ने कहा नोटबंदी पीएम की ग़लती नहीं एक बड़ा स्कैम है
टबंदी और रफ़ायल डील के मुद्दे पर गुरुवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच काफ़ी तल्ख़ बयानबाज़ी हुई.
इसकी शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की प्रेसवार्ता से हुई जिसका बाद में बीजेपी ने जवाब दिया.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि नोटबंदी एक बहुत बड़ा स्कैम है जो ग़लती से नहीं बल्कि जानबूझकर हुआ है.
दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय में राहुल गांधी ने कहा, "देश के कुछ सबसे बड़े उद्योगपतियो ने बैंक का लोन लिया था जो एनपीए में बदल गया था. नरेंद्र मोदी जी ने देश की जनता का पैसा लेकर, आपकी जेब से पैसा निकालकर, सीधा हिंदुस्तान के सबसे बड़े पूंजीपतियों की जेब में डाला. ये नोटबंदी का लक्ष्य था."
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्णय ने देश की इकोनॉमी की धज्जियां उड़ा दीं. राहुल गांधी ने नोटबंदी को प्रधानमंत्री की ग़लती नहीं बल्कि एक बड़ा स्कैम करार दिया.
बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "मैं इस प्रेसवार्ता के बाद कह सकता हूं कि राहुल गांधी एक बहुत ही अगंभीर राजनीतिक खिलाड़ी हैं. राहुल गांधी ने कहा कि लोगों से जेब से पैसा निकाल लिया गया. जेब काटना क्या होता है मैं साधारण तरीके से बताता हूं. ए से ज़ेड तक कांग्रेस पार्टी भ्रष्ट है."
बीजेपी प्रवक्ता ने दावा किया कि 'सर्वाधिक नक्सलियों का समर्पण नोटबंदी के दौरान हुआ था और इसके बावजूद राहुल गांधी नोटबं
उन्होंने कहा, "अनिल अंबानी ने कभी जहाज़ नहीं बनाए. वो 45 हज़ार करोड़ रुपए कर्ज़ में हैं. अनिल अंबानी जी ने कंपनी कुछ ही दिन पहले खोली. दूसरी तरफ़ सरकारी कंपनी एचएएल है जो 70 साल से हवाई जहाज़ बना रही है. कोई कर्ज़ा नहीं है. उनके पास हज़ारों इंजीनियर हैं."
राहुल गांधी ने कहा कि जो हवाई जहाज़ 520 करोड़ का था उसे आपने 1600 करोड़ रुपये में क्यों ख़रीदा.
बीजेपी प्रवक्ता का कहना था कि राहुल गांधी के पास कहने को कुछ नया नहीं है और रफ़ाल पर बैठकर उनका करियर लॉन्च नहीं होगा.
दी को गलत बताते हैं.'
बीजेपी ने राहुल गांधी को चुनौती दी कि वो उनमें से एक भी उद्योगपति का नाम बता दे जो बीते चार सालों में अरबपति बना हो.
संबित पात्रा ने कहा, "कांग्रेस पार्टी और गाँधी परिवार के पुरखों ने पैसा लूट-लूट कर जो रखा था, जीप स्कैम से अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम तक ये सारे नोटबंदी के बाद पैसे कागज के टुकड़े बन गए."
रफ़ायल पर कांग्रेस का हमला
बुधवार को राहुल गांधी ने ट्वीट कर वित्त मंत्री को चुनौती दी थी कि वो रफ़ायल डील पर संयुक्त संसदीय समिति का गठन करें.
उन्होंने नाटकीय अंदाज़ में वित्त मंत्री अरुण जेटली को इसका जवाब देने के लिए 24 घंटों का वक्त दिया था. गुरुवार को एक और ट्वीट कर राहुल गांधी ने वित्त मंत्री को चुनौती याद दिलाई.
राहुल गांधी ने रफ़ायल डील पर अपना पुराना स्टैंड दोहराते हुए कहा कि ये भ्रष्टाचार का एक सीधा मामला है.
इसकी शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की प्रेसवार्ता से हुई जिसका बाद में बीजेपी ने जवाब दिया.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि नोटबंदी एक बहुत बड़ा स्कैम है जो ग़लती से नहीं बल्कि जानबूझकर हुआ है.
दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय में राहुल गांधी ने कहा, "देश के कुछ सबसे बड़े उद्योगपतियो ने बैंक का लोन लिया था जो एनपीए में बदल गया था. नरेंद्र मोदी जी ने देश की जनता का पैसा लेकर, आपकी जेब से पैसा निकालकर, सीधा हिंदुस्तान के सबसे बड़े पूंजीपतियों की जेब में डाला. ये नोटबंदी का लक्ष्य था."
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्णय ने देश की इकोनॉमी की धज्जियां उड़ा दीं. राहुल गांधी ने नोटबंदी को प्रधानमंत्री की ग़लती नहीं बल्कि एक बड़ा स्कैम करार दिया.
बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "मैं इस प्रेसवार्ता के बाद कह सकता हूं कि राहुल गांधी एक बहुत ही अगंभीर राजनीतिक खिलाड़ी हैं. राहुल गांधी ने कहा कि लोगों से जेब से पैसा निकाल लिया गया. जेब काटना क्या होता है मैं साधारण तरीके से बताता हूं. ए से ज़ेड तक कांग्रेस पार्टी भ्रष्ट है."
बीजेपी प्रवक्ता ने दावा किया कि 'सर्वाधिक नक्सलियों का समर्पण नोटबंदी के दौरान हुआ था और इसके बावजूद राहुल गांधी नोटबं
उन्होंने कहा, "अनिल अंबानी ने कभी जहाज़ नहीं बनाए. वो 45 हज़ार करोड़ रुपए कर्ज़ में हैं. अनिल अंबानी जी ने कंपनी कुछ ही दिन पहले खोली. दूसरी तरफ़ सरकारी कंपनी एचएएल है जो 70 साल से हवाई जहाज़ बना रही है. कोई कर्ज़ा नहीं है. उनके पास हज़ारों इंजीनियर हैं."
राहुल गांधी ने कहा कि जो हवाई जहाज़ 520 करोड़ का था उसे आपने 1600 करोड़ रुपये में क्यों ख़रीदा.
बीजेपी प्रवक्ता का कहना था कि राहुल गांधी के पास कहने को कुछ नया नहीं है और रफ़ाल पर बैठकर उनका करियर लॉन्च नहीं होगा.
दी को गलत बताते हैं.'
बीजेपी ने राहुल गांधी को चुनौती दी कि वो उनमें से एक भी उद्योगपति का नाम बता दे जो बीते चार सालों में अरबपति बना हो.
संबित पात्रा ने कहा, "कांग्रेस पार्टी और गाँधी परिवार के पुरखों ने पैसा लूट-लूट कर जो रखा था, जीप स्कैम से अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम तक ये सारे नोटबंदी के बाद पैसे कागज के टुकड़े बन गए."
रफ़ायल पर कांग्रेस का हमला
बुधवार को राहुल गांधी ने ट्वीट कर वित्त मंत्री को चुनौती दी थी कि वो रफ़ायल डील पर संयुक्त संसदीय समिति का गठन करें.
उन्होंने नाटकीय अंदाज़ में वित्त मंत्री अरुण जेटली को इसका जवाब देने के लिए 24 घंटों का वक्त दिया था. गुरुवार को एक और ट्वीट कर राहुल गांधी ने वित्त मंत्री को चुनौती याद दिलाई.
राहुल गांधी ने रफ़ायल डील पर अपना पुराना स्टैंड दोहराते हुए कहा कि ये भ्रष्टाचार का एक सीधा मामला है.
Thursday, August 30, 2018
中国经济发展与减排可共赢
一份研究认为,中国积极减排,从而改善能源结构、确保高生产率,中国经济将从中受益。
11月14日发布的这份《中国与新气候经济》报告,属于全球经济和气候委员会的新气候经济项目国别研究成果之一。
《报告》的作者之一、清华大学能源环境经济研究所研究员滕飞说,通过适当的政策设计,2030年达到温室气体排放峰值这一目标对中国经济的负面冲击,可以控制在GDP 的1%之内。如果考虑到其带来的降低空气污染的环境和健康协同效益,相当一部分的经济成本还可以被抵消。
《报告》预测:中国经济增速在2030年将回落至5%。“中国走低碳发展道路是不可避免的。中国必须转型,否则我们无法达到社会经济发展等其他远景。”中国外交部气候变化谈判特别代表高风谈到。
《报告》分析了GDP增速为7%和4%的情景下所带来的化石能源消费与碳排放结果,结果显示:较快的经济增长,使得碳排放绝对量的减排任务变得更加艰难;但如果中国还可以保持7%的GDP增长率,并从中拿出1%GDP用于节能改造、发展新能源技术等,中国对环境质量的改善将比低速增长率情景下容易得多。
在现有节能减排力度下,由于中国经济更易受到能源价格变动的冲击,受影响的产业部门占GDP的约20%,则接近50%的中国城市到2030年仍存在空气质量不达标的风险,尤其是长三角和京津冀地区的主要城市。能源和经济的结构性问题是不达标的主要原因。
同时,即使中国保持目前的节能政策力度,到2030 年石油的对外依存度将达到75%,天然气对外依存度将超过40%,煤炭也将大幅超出安全高效的科学产能,能源供应和能源安全方面存在巨大压力。
也就是说:如果不采取更积极的减排措施,中国可能付出经济和环境的双重代价。
国家气候变化专家委员会副主任、清华大学低碳经济研究院院长何建坤说道:“按照目前节能减排的政策和力度,中国到2030是不可能实现峰值的,很可能会推后。但现在有目标,有利于促进经济转型,建立起发展新能源的倒逼机制,并采取强有力的措施去实现。”
因此《报告》测算出在加速减排的情景下,中国的能源二氧化碳排放将在2030年左右停止增长并尽快开始下降,2030年的单位GDP二氧化碳排放强度会比2010年降低约58%。在这一目标下结合严格的末端处理措施和结构调整政策,可以在2030年实现中国主要城市空气质量的全面达标。
未来由于投资回报率的降低,投资拉动的高经济增长趋势是不可持续的,而资源约束对经济增长的负面影响正逐步显现。如果中国不能通过技术进步及生产率的提高部分抵消资源约束的负面作用,则中国有可能陷入低速增长的“中等收入陷阱”。
反之,在维持较高生产率的情形下,中国能保持更好的增长速度,2010-2020年达到7.9%,2020-2030年达到6%, - 达到4.6%。到2030年中国的经济规模将超过美国,并成为世界第一大经济体。
就在上一周,习近平和奥巴马发表了中美气候变化联合声明。《报告》的研究内容将有助于解读中国承诺目标的可行性。基于研究,《报告》建议在产能过剩的高耗能行业和经济相对发达的东部地区,首先引入总量减排目标,并逐步扩展成覆盖所有行业和所有地区的总量减排目标。
首先应对煤炭消费总量进行控制,使煤炭消费总量在2020 年后停止增长,并尽快实现绝对下降。新能源和可再生能源技术将成为未来经济新的增长点。
滕飞谈到,在进行温室气体排放和能源消费总量控制的同时,应继续推动化石能源的价格改革。通过价格改革可以使化石燃料价格体现隐藏的外部环境成本,逐步建立起有利于清洁能源和可再生能源发展的市场环境。通过竞争性的市场鼓励企业投资于低碳技术,并激发低碳技术领域的创新与发展。
“关于2030年达到峰值,其前体条件是年GDP碳强度的下降率要大于 的增长率,2030年左右GDP回落到5%左右。如果中国经济增长低于预期,则实现年份有可能提前。但是大多数人认为中国经济还需要快速增长一段时间,很大程度取决于经济发展前景。” 滕飞补充道。
11月14日发布的这份《中国与新气候经济》报告,属于全球经济和气候委员会的新气候经济项目国别研究成果之一。
《报告》的作者之一、清华大学能源环境经济研究所研究员滕飞说,通过适当的政策设计,2030年达到温室气体排放峰值这一目标对中国经济的负面冲击,可以控制在GDP 的1%之内。如果考虑到其带来的降低空气污染的环境和健康协同效益,相当一部分的经济成本还可以被抵消。
《报告》预测:中国经济增速在2030年将回落至5%。“中国走低碳发展道路是不可避免的。中国必须转型,否则我们无法达到社会经济发展等其他远景。”中国外交部气候变化谈判特别代表高风谈到。
《报告》分析了GDP增速为7%和4%的情景下所带来的化石能源消费与碳排放结果,结果显示:较快的经济增长,使得碳排放绝对量的减排任务变得更加艰难;但如果中国还可以保持7%的GDP增长率,并从中拿出1%GDP用于节能改造、发展新能源技术等,中国对环境质量的改善将比低速增长率情景下容易得多。
在现有节能减排力度下,由于中国经济更易受到能源价格变动的冲击,受影响的产业部门占GDP的约20%,则接近50%的中国城市到2030年仍存在空气质量不达标的风险,尤其是长三角和京津冀地区的主要城市。能源和经济的结构性问题是不达标的主要原因。
同时,即使中国保持目前的节能政策力度,到2030 年石油的对外依存度将达到75%,天然气对外依存度将超过40%,煤炭也将大幅超出安全高效的科学产能,能源供应和能源安全方面存在巨大压力。
也就是说:如果不采取更积极的减排措施,中国可能付出经济和环境的双重代价。
国家气候变化专家委员会副主任、清华大学低碳经济研究院院长何建坤说道:“按照目前节能减排的政策和力度,中国到2030是不可能实现峰值的,很可能会推后。但现在有目标,有利于促进经济转型,建立起发展新能源的倒逼机制,并采取强有力的措施去实现。”
因此《报告》测算出在加速减排的情景下,中国的能源二氧化碳排放将在2030年左右停止增长并尽快开始下降,2030年的单位GDP二氧化碳排放强度会比2010年降低约58%。在这一目标下结合严格的末端处理措施和结构调整政策,可以在2030年实现中国主要城市空气质量的全面达标。
未来由于投资回报率的降低,投资拉动的高经济增长趋势是不可持续的,而资源约束对经济增长的负面影响正逐步显现。如果中国不能通过技术进步及生产率的提高部分抵消资源约束的负面作用,则中国有可能陷入低速增长的“中等收入陷阱”。
反之,在维持较高生产率的情形下,中国能保持更好的增长速度,2010-2020年达到7.9%,2020-2030年达到6%, - 达到4.6%。到2030年中国的经济规模将超过美国,并成为世界第一大经济体。
就在上一周,习近平和奥巴马发表了中美气候变化联合声明。《报告》的研究内容将有助于解读中国承诺目标的可行性。基于研究,《报告》建议在产能过剩的高耗能行业和经济相对发达的东部地区,首先引入总量减排目标,并逐步扩展成覆盖所有行业和所有地区的总量减排目标。
首先应对煤炭消费总量进行控制,使煤炭消费总量在2020 年后停止增长,并尽快实现绝对下降。新能源和可再生能源技术将成为未来经济新的增长点。
滕飞谈到,在进行温室气体排放和能源消费总量控制的同时,应继续推动化石能源的价格改革。通过价格改革可以使化石燃料价格体现隐藏的外部环境成本,逐步建立起有利于清洁能源和可再生能源发展的市场环境。通过竞争性的市场鼓励企业投资于低碳技术,并激发低碳技术领域的创新与发展。
“关于2030年达到峰值,其前体条件是年GDP碳强度的下降率要大于 的增长率,2030年左右GDP回落到5%左右。如果中国经济增长低于预期,则实现年份有可能提前。但是大多数人认为中国经济还需要快速增长一段时间,很大程度取决于经济发展前景。” 滕飞补充道。
Wednesday, August 29, 2018
尼泊尔山体滑坡幸存者面临的生存困境
两周前(8月2日),尼泊尔发生重大山体滑坡事件,辛杜帕尔乔克(加德满都附近的一个区)损失惨重。塔拉·阿迪卡里与自己的两个孩子就住在离山体滑坡几米远的地方。
山体滑坡发生时,滑下的山体阻塞了森科西河,形成巨大堰塞湖。为了疏通水道,附近的尼泊尔部队正在实施受控爆破。每一次爆破,阿迪卡里的脑海里都会浮现出那些已经逝去的邻居的面孔。
尽管尼泊尔政府已发出命令,要求居民离开受灾地区,阿迪卡里还是选择留了下来。她说:“他们(政府)让我们去临时棚户房。从家里走过去只需要一个小时,但是如果我去了,谁来照看我的家畜?我这所房子又会遭遇什么?这可是我们用尽一生的心血和努力劳作才贷款盖起来的房子,我们怎么能离开这里呢?”三年前,她的丈夫为了赚钱,跑去卡塔尔工作,现在仍然在努力偿还贷款。
8月2日发生在中国与尼泊尔边境地区的山体滑坡事件冲垮了尼泊尔的三座村庄,导致156人死亡。尼泊尔下游地区与邻国印度也因此担心会有山洪爆发。目前印度政府已将40万居民从比哈尔撤离。托塔帕尼是尼泊尔与西藏交界处的一个小镇。目前有1000余名朝圣者和游客在徒步西藏的归途中被困于此。在加德满都与该镇之间,不断有救援直升机飞过,援助被困游客,并为其带来补给。
该地区余震频繁,爆炸声不断。但是,留下来的人都在努力地生活着。比时努·帕拉居里已经60岁了,在这次灾难中他失去了姐姐,以及两个外孙和一个侄子。他说:“我们还是比较幸运的,至少我们找到了逝去亲人的遗体,还能给他们举行最后的仪式。不管遭遇什么困难,我们都应继续生活。” 现在的他在田地里忙着准备种植水稻。
在此次山体滑坡事件中,政府宣布有156人丧生,但救援部队只找到33具遗体。受灾村庄附近的一位救援武装警察说道:“我们在滑坡附近闻到死尸的味道,但岩石还在坠落,地块又极其不稳定,我们无法进去找到遇难者的遗体。”
70余座房屋顷刻倒塌。兰詹·阿迪卡里就读的学校也在其中。他是该校七年级的学生,他的6个朋友都在这次滑坡中遇难,但是他不知道学校里还有多少人也死于这场灾难。学校现在只剩一片废墟。“我希望学校能够重建,我还能继续上学。”他一边说着,一边从地里摘起玉米放进竹篮里。
滑坡附近的大多数村民白天都呆在自己家里,晚上去政府搭建的临时棚户房过夜。也有少数人无论白天还是晚上都呆在自己家里,萨帕纳·卡尔基就是其中之一。她说:“我们不能离开这里,因为别无选择。如果死亡是上帝的旨意,那么我们也会接受。”她也在田里忙着准备种植水稻。难者家属责怪尼泊尔政府并未全力救援山体滑坡中被困的群众,也没有提供足够的救灾物资。比时努·帕拉居里说:“我们现在收到的只有一袋大米,干豆,以及其他一些食材和床垫。除了这些,啥都没有。”政府官员称,现在的确无法立即为受灾群众重建家园,但是政府已经提供足够的救灾物资。地区救灾抢险小组委员会的官员尤巴拉杰·卡特尔说道:“我们为受灾群众准备了足够的食物和其他物资,并且已定期发放,所以他们说的物资不足问题并不存在。”
卡特尔称,约有500名受灾人员已获得援助物资。堰塞湖下游居民同样需要援助,但政府却心有余而力不足。“堰塞湖下游有上万居民,尽管居住在下游城市很危险,但是我们无法为尼印边界的上万人都提供援助物资。”卡特尔继续说道。阿尼哥高速路是连接尼泊尔与西藏的主要贸易路线,现在该高速公路的某些路段已经完全被损坏。卡特尔说:“我们正在努力打通其他路线,很快就能通行。”
山洪暴发的可能性依然很高
专家估计森科西河上形成的堰塞湖水量约为800万立方米。尼泊尔部队所采用的抽水措施收效甚微。特里布万大学的地质学教授苏博德·达喀尔博士在该地区监测堰塞湖时说道:“抽水还在持续,但要想将使下游居民都处在危险之中的如此巨大水量排空,实在太有挑战性。我们必须进行严密的检验,但是从总体观察来看,该水坝是由坚硬的岩石和泥土堆砌而成,立即溃堤的可能性不大。”
阿尼哥高速路沿线的许多下游旅游度假村和市场仍未全部重新开业。居民已将店里的货物转移到比较安全的地方,目前却开始慢慢地将货物运回。森科西河旅游度假村位于堰塞湖下游几千米远的苏库特,其经营者安让·卡德加说道:“我们白天呆在店里,晚上就住在地势较高的亲戚家里。” 在尼泊尔,山体滑坡是仅次于流行病的第二大危险灾害。尽管如此,尼泊尔却鲜少采取预防或减灾措施。地质学家曾要求政府绘制一份详细的尼泊尔山体滑坡图,并制订异地安置计划,减少人员伤亡。苏博德·达喀尔博士说道:“鉴于问题的严重性,应该设立一个独立的机构来处理山体滑坡事件,并定期在全国开展研究工作。可不幸的是,我们国家的地质环境脆弱,政府不仅 [对山体滑坡]重视不足,也没有建立特定的机构来处理这类问题。”
专家称,尼泊尔的土地使用政策并不完善,因此人们想在哪里定居就在哪里定居,只要那块土地属于他。最近刚刚卸任城市发展规划部部长一职的基肖尔·塔帕说道:“随着灾难发生的频率越来越高,伤亡人数也越来越多,政府迫切需要采取更为严格的土地使用政策,规定人们只能在经过严格地质考察的地方定居。尼泊尔政府虽已通过土地使用政策,但是
山体滑坡发生时,滑下的山体阻塞了森科西河,形成巨大堰塞湖。为了疏通水道,附近的尼泊尔部队正在实施受控爆破。每一次爆破,阿迪卡里的脑海里都会浮现出那些已经逝去的邻居的面孔。
尽管尼泊尔政府已发出命令,要求居民离开受灾地区,阿迪卡里还是选择留了下来。她说:“他们(政府)让我们去临时棚户房。从家里走过去只需要一个小时,但是如果我去了,谁来照看我的家畜?我这所房子又会遭遇什么?这可是我们用尽一生的心血和努力劳作才贷款盖起来的房子,我们怎么能离开这里呢?”三年前,她的丈夫为了赚钱,跑去卡塔尔工作,现在仍然在努力偿还贷款。
8月2日发生在中国与尼泊尔边境地区的山体滑坡事件冲垮了尼泊尔的三座村庄,导致156人死亡。尼泊尔下游地区与邻国印度也因此担心会有山洪爆发。目前印度政府已将40万居民从比哈尔撤离。托塔帕尼是尼泊尔与西藏交界处的一个小镇。目前有1000余名朝圣者和游客在徒步西藏的归途中被困于此。在加德满都与该镇之间,不断有救援直升机飞过,援助被困游客,并为其带来补给。
该地区余震频繁,爆炸声不断。但是,留下来的人都在努力地生活着。比时努·帕拉居里已经60岁了,在这次灾难中他失去了姐姐,以及两个外孙和一个侄子。他说:“我们还是比较幸运的,至少我们找到了逝去亲人的遗体,还能给他们举行最后的仪式。不管遭遇什么困难,我们都应继续生活。” 现在的他在田地里忙着准备种植水稻。
在此次山体滑坡事件中,政府宣布有156人丧生,但救援部队只找到33具遗体。受灾村庄附近的一位救援武装警察说道:“我们在滑坡附近闻到死尸的味道,但岩石还在坠落,地块又极其不稳定,我们无法进去找到遇难者的遗体。”
70余座房屋顷刻倒塌。兰詹·阿迪卡里就读的学校也在其中。他是该校七年级的学生,他的6个朋友都在这次滑坡中遇难,但是他不知道学校里还有多少人也死于这场灾难。学校现在只剩一片废墟。“我希望学校能够重建,我还能继续上学。”他一边说着,一边从地里摘起玉米放进竹篮里。
滑坡附近的大多数村民白天都呆在自己家里,晚上去政府搭建的临时棚户房过夜。也有少数人无论白天还是晚上都呆在自己家里,萨帕纳·卡尔基就是其中之一。她说:“我们不能离开这里,因为别无选择。如果死亡是上帝的旨意,那么我们也会接受。”她也在田里忙着准备种植水稻。难者家属责怪尼泊尔政府并未全力救援山体滑坡中被困的群众,也没有提供足够的救灾物资。比时努·帕拉居里说:“我们现在收到的只有一袋大米,干豆,以及其他一些食材和床垫。除了这些,啥都没有。”政府官员称,现在的确无法立即为受灾群众重建家园,但是政府已经提供足够的救灾物资。地区救灾抢险小组委员会的官员尤巴拉杰·卡特尔说道:“我们为受灾群众准备了足够的食物和其他物资,并且已定期发放,所以他们说的物资不足问题并不存在。”
卡特尔称,约有500名受灾人员已获得援助物资。堰塞湖下游居民同样需要援助,但政府却心有余而力不足。“堰塞湖下游有上万居民,尽管居住在下游城市很危险,但是我们无法为尼印边界的上万人都提供援助物资。”卡特尔继续说道。阿尼哥高速路是连接尼泊尔与西藏的主要贸易路线,现在该高速公路的某些路段已经完全被损坏。卡特尔说:“我们正在努力打通其他路线,很快就能通行。”
山洪暴发的可能性依然很高
专家估计森科西河上形成的堰塞湖水量约为800万立方米。尼泊尔部队所采用的抽水措施收效甚微。特里布万大学的地质学教授苏博德·达喀尔博士在该地区监测堰塞湖时说道:“抽水还在持续,但要想将使下游居民都处在危险之中的如此巨大水量排空,实在太有挑战性。我们必须进行严密的检验,但是从总体观察来看,该水坝是由坚硬的岩石和泥土堆砌而成,立即溃堤的可能性不大。”
阿尼哥高速路沿线的许多下游旅游度假村和市场仍未全部重新开业。居民已将店里的货物转移到比较安全的地方,目前却开始慢慢地将货物运回。森科西河旅游度假村位于堰塞湖下游几千米远的苏库特,其经营者安让·卡德加说道:“我们白天呆在店里,晚上就住在地势较高的亲戚家里。” 在尼泊尔,山体滑坡是仅次于流行病的第二大危险灾害。尽管如此,尼泊尔却鲜少采取预防或减灾措施。地质学家曾要求政府绘制一份详细的尼泊尔山体滑坡图,并制订异地安置计划,减少人员伤亡。苏博德·达喀尔博士说道:“鉴于问题的严重性,应该设立一个独立的机构来处理山体滑坡事件,并定期在全国开展研究工作。可不幸的是,我们国家的地质环境脆弱,政府不仅 [对山体滑坡]重视不足,也没有建立特定的机构来处理这类问题。”
专家称,尼泊尔的土地使用政策并不完善,因此人们想在哪里定居就在哪里定居,只要那块土地属于他。最近刚刚卸任城市发展规划部部长一职的基肖尔·塔帕说道:“随着灾难发生的频率越来越高,伤亡人数也越来越多,政府迫切需要采取更为严格的土地使用政策,规定人们只能在经过严格地质考察的地方定居。尼泊尔政府虽已通过土地使用政策,但是
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