Wednesday, July 3, 2019

दलाई लामा: महिलाओं पर दिए बयान पर माफ़ी मांगी

तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने महिलाओं पर दिए अपने विवादित बयान पर माफ़ी मांगी है.
बीबीसी से बात करते हुए दलाई लामा ने कहा था कि अगर कोई महिला दलाई लामा बनती हैं तो उनका आकर्षक होना ज़रूरी है.
लेकिन उनके कार्यालय ने उनके शब्दों के लिए माफ़ी मांगते हुए कहा है कि वो मज़ाक कर रहे थे. "उन्होंने इसके लिए माफ़ी मांगी हैं कि उनकी कही बात से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं."
दलाई लामा ने बीबीसी को दिए गए अपने इंटरव्यू में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप, अपने तिब्बत लौटने समेत कई मुद्दों पर बात की थी.
इसी बातचीत के दौरान उन्होंने जिस नज़रिए से महिला दलाई लामा पर बात की उस पर बहुत-से लोगों ने आपत्ति जताई.
साक्षात्कार में उन्होंने हंसते हुए कहा था, "अगर कोई महिला दलाई लामा होती हैं तो उन्हें अधिक आकर्षक होना चाहिए"
आधिकारिक बयान में माफ़ी मांगते हुए कहा गया है, "कभी-कभी इस तरह की टिप्पणियां संदर्भ से अलग होती हैं, इनके सांस्कृतिक संदर्भ अलग होते हैं फिर मज़ाकियां बात जब किसी एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवादित हो तो वो अपना हास्य खो देती है. दलाई लामा को इस बात से बेहद खेद है"
जारी बयान में ये भी कहा गया कि दलाई लामा ने पूरे जीवन में महिलाओं को वस्तु मानने वाले विचारों का विरोध किया है और महिला-पुरूष समानता का समर्थन किया है.
दलाई लामा ने रिफ्यूज़ियों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि यूरोपीय यूनियन के रिफ्यूजियों को अपने घर लौट जाना चाहिए.
इस टिप्पणी पर भी सफाई देते हुए कहा गया है कि उनकी इस बात को गलत समझा गया.
बयान के मुताबिक,"वो इस की प्रशंसा करते हैं कि ज़्यादातर लोग जिन्होंने अपना देश छोड़ा है अब वापस जाना नहीं चाहते हैं"
डोनल्ड ट्रंप पर भी उन्होंने टिप्पणी की थी जिसमें उन्होंने ट्रंप के विचारों में नैतिकता की कमी बताई थी. लेकिन इस टिप्पणी पर दलाई लामा ने माफी नहीं मांगी है.
लीबिया के एक शरणार्थी शिविर पर हुए हवाई हमले में कम से कम चालीस लोग मारे गए हैं.
अधिकारियों का कहना है कि यह हमला शरणार्थी केंद्र पर हुआ जिसकी वजह से चालीस लोगों की मौत हो गई और क़रीब 80 लोग इस हमले में घायल हो गए. यह हमला लीबिया की राजधानी त्रिपोली के पूर्वी हिस्से में हुआ.
शुरुआती जानकारी के अनुसार मारे गए लोगों में से अधिकतर अफ्रीकी शरणार्थीं हैं.
बीते कुछ सालों से यूरोप जाने वाले शरणार्थियों के लिए लीबिया एक प्रमुख फौजी चौकी बनी हुई है.
लंबे समय के शासक मुअम्मर गद्दाफी को 2011 में अपदस्थ और मारे जाने के बाद से देश हिंसा और विभाजन से टूट गया है.
आपातकालीन सेवा के प्रवक्ता ओसामा अली ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया जिस जगह यह हमला हुआ वहां क़रीब 120 शरणार्थी थे.
अली ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मरने वालों की संख्या अभी और भी बढ़ सकती है क्योंकि जो आंकड़े अभी आ रहे हैं वो बेहद शुरुआती हैं.
संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाली और प्रधानमंत्री फायेज़ अल सेरा के नेतृत्व वाली गवर्नमेंट ऑफ़ नेशनल अकॉर्ड ने त्रिपोली के पूर्वी उप-नगर ताजौरा में हुए हवाई हमले के लिए लीबयन नेशनल आर्मी पर आरोप लगाया है.

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